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संभोग से समाधि (पेपर बेक)




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Book Details

Author Osho
Publication Kalpavriksha Publication
Language Hindi
Category Spirituality
Pages 464
Dimension 21.5 x 14 x 2.5 cm
Weight 490 gm
ISBN 978-81-965735-2-2
About Book ओशो कहेते हैः जगत में ब्रह्मचर्य का जन्म हो सकता है, मनुष्य सेक्स के ऊपर उठ सकता है, लेकिन सेक्स को समझ कर, सेक्स को पूरी तरह पहचान कर | दबाने और छीपाने से मनुष्य सेक्स के कभी मुक्त नहीं हो गया, बल्कि मनुष्य और भी बुरी तरह से सेक्स से ग्रसित हो गया, दमन उलटे परिणाम लाया है | वासना रुपांतरित हो तो पत्नी मां बन सकती है, वासना रुपांतरित हो, तो काम प्रेम बन सकता है | प्रेम जब भी कुछ दे पाता है, तब खुश होता है | अहंकार जब भी कुछ ले पाता है, तभी खुश होता है | संभोग के अनुभव में अहंकार विसर्जित हो जाता है, इगोलेसनेस पेदा हो जाती है. एक क्षण के लिए अहंकार नहीं रह जाता, एक क्षण को यह याद भी नहीं रह जाता कि मैं हूं | किसी निर्बल का बल राम नहीं है | जिसकी निर्बलता गई, वह राम हो जाता है | निर्बलता गई कि राम और श्याम में फासला ही नहीं रह जाता | निर्बलता ही फासला है, वहीं डिस्टेंस है |

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