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सत्ता और समाज (Hard Cover)




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Book Details

Author Dhirubhai Sheth
Co-author Abhaykumar Dube
Publication Vani Prakashan
Language Hindi
Category Non-Fiction
Pages 514
Dimension 20 x 14 x 4 cm
Weight 750 gm
ISBN 978-93-5000-096-0
About Book यह पुस्तक ऐसे प्रश्नों का उत्तर है जिन्हें जानने के लिए हर व्यक्ति तत्पर बेठा है। समाज-विज्ञान के छात्र यह पूछ सकते हैं कि समाज के संदर्भ में सत्ता किस के पास रहती है, किसके पास रहनी चाहिए और किस आधार पर उसका प्रयोग किया जाना चाहिए? इन प्रश्नों के प्रकाश में आधुनिक विचार के दायरे में सत्ता के प्रश्न पर गहराई से चिंतन-मनन किया गया है। सत्ता से जुड़े अहम सवालों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण यह है कि सत्ता समाज में व्यापक और समान रूप से वितरित है या किसी शासक वर्ग या किसी ‘पॉवर इलीट’ के हाथों में केंद्रित है?  सत्ता का प्रश्न उस समय और जटिल हो जाता है जब सत्ता और उसका प्रयोग करने से जुड़े इरादे के समीकरण पर ग़ौर किया जाता है। पार्टियाँ, सरकार, हित-समूह और बड़े-बड़े कॉरपोरेशन सत्ता का इस्तेमाल करते हुए देखे जा सकते हैं। यह सत्ता के इरादतन प्रयोग के उदाहरण हैं। पर क्या यही बात एक विज्ञापक के लिए भी कही जा सकती है? उसका इरादा तो महज़ अपने उत्पाद की बिक्री बढ़ाना है। तो फिर उसके द्वारा जारी विज्ञापन उपभोक्ताओं पर अपनी सत्ता किस तरह से कायम करता है? उपभोक्ता उस विज्ञापन के प्रभाव में कुछ ख़ास तरह के मूल्यों के हक में क्यों झुक जाते हैं? स्पष्ट है कि सत्ता के ‘अभिप्रेत’ रूपों के अलावा भी कुछ ऐसे रूप हैं जिन्हें सत्ता के ‘संरचनागत’ रूपों की संज्ञा दी जा सकती है।

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